क्या आपको बोलना आता है

हर यक्ति चाहता है की वह सबके सामने बढ़िया बोल सके.परन्तु ज्यादातर लोगो की यह चाहत पूरी नहीं होती. ज्यादातर लोग घटिया वक्ता होते है.

क्यों.? इसका कारण सीधा सा है. लोग बोलते है समय बढ़ी, महत्वपूर्ण बातो के बजाये छोटी, घटिया बातो पर ध्यान देते है. चर्चा की तेयारी करते समय कई लोग खुद को मानसिक निर्देश देते रहते है ‘मुझे सीधे खड़े रहना है’ इधर-उधर नहीं हिलना है और अपने हाथो का प्रयोग नहीं करना है ‘जनता को यह पता न चलने दे की आप नोट्स की मदद ले रहे है’ याद रखे ग्रामर की गलती न होने दे. इस बात का विशेष ध्यान रखे की आपकी टाई सीधी रहे. जोर से बोले, पर ज्यादा जोर से भी न बोले.

जब वक्ता बोलने के लिए खड़ा होता है तो क्या होता है ? वह डरा हुआ होता है क्योकि उसने अपने दिमाग में एक सूचि बना ली है की उसे क्या चीजे नहीं करनी. क्या मेने कोई गलती कर दी है? सक्षेप में,वह फ्लॉप हो जाता है. वह इसलिए फ्लॉप होता है क्योकि उसने एक अच्छे वक्ता के छोटे, घटिया, तुलनात्मक रूप से महत्वहींन गुणों पर ध्यान केन्द्रत किया है और वक्ता के बड़े गुणों पर ध्यान केन्द्रित नहीं किया है जिस बारे में बोलने जा रहे है उसका ज्ञान और दुसरो लोगो को बताने की उत्कष्ट इछा.

अच्छे वक्ता का असली इम्तिहान इस बात में नहीं की वह सीधा खड़ा होता है या नहीं, वह ग्रामर में गलतियों करता है या नहीं बल्कि इस बात में होता है की वह जनता तक अपनी बाद ठीक ढंग से पहुचाता है या नही हमारे ज्यादातर वक्ताओ  में कई तरह के दोष होते है कइयो की तो आवाज ही खराब है. अमेरिका के बहुत से प्रसिद्ध वक्ताओ को अगर भाषण देने की परीक्षा में बिठाया जाये तो कई फ़ैल हो जाएगे.