इन कामों में कभी नहीं करना चाहिए शर्म

जीवन में अक्सर अनजाने में हम कुछ न कुछ गलतिया कर जाते है जिनका हमें जीवन भर अफ़सोस होता है. चाणक्य ने अपनी नीतियों से समाज में कई सन्देश दिए है जिन्हे हम अपने जीवन में अपनाकर अपने जीवन को बेहतर बना सकते है. चाणक्य के अनुसार हमें जीवन में किसी भी कार्य को करने में शर्म महसूस नहीं करनी करनी चाहिए. यदि हमने काम में शर्म महसूस की तो जीवन की गाडी वही पर थम जाती है और जीवन में हमें किसी भी परिस्थिति में सफलता प्राप्त नहीं होती है.

जीवन एक गाडी है यदि गाडी का एक पहिया खराब हो जाता है तो गाडी वही थम जाती है. और जीवन को सही से जीने के लिए हमें किसी भी कार्य में शर्म नहीं करनी चाहिए. जो व्यक्ति काम में शर्म करता है तो वह व्यक्ति जीवन में कई परेशानियों का सामना करता है. चाणक्य ने ऐसी कई बातो का उल्लेख किया है जिनसे हम अपना जीवन सार्थक बना सकते है. यमे जीवन में कई कामो के लिए तो बेशर्म ही बनना पड़ता है. तभी हम उस काम को कर पाते है. अन्यथा हम उस कार्य को पूर्ण रूप से नहीं कर सकते है. आज हम आपको बताते है की किन कामो में मनुष्य को बेशर्म बनना पड़ता है

पैसा मांगना :

यदि आपने किसी को पैसा दिया है तो आपको उससे पैसा वापस मांगने के लिए बेशर्म बनना पड़ता है. यदि आप बेशर्म नहीं बनोगे तो आपको पैसों की हानि उठाना पड़ेगी.

खाना खाना :

जब कोई व्यक्ति अपने रिश्तेदारों के घर या किसी परिचित के घर जाते है तो वह शर्म के मरे वह खाना ठीक तरह से खा नहीं पाते है. कई लोग तो शर्म के मरे भूखे ही रह जाते है. जो व्यक्ति शर्म करता है वह बाहर कही भी खाना खा नहीं पाते है.

ज्ञान :

जो व्यक्ति पढ़ाई करने में अपने गुरु से शर्म करता है तो वह व्यक्ति अज्ञानी रह जाता है. जब तक आप बिना शर्म के अपने गुरु से किसी बात की जानकारी नहीं लोगो तब तक आप अज्ञानी ही रहते है. विद्यार्थी को कभी भी अपने गुरु से शर्म नहीं करनी चाहिए. नहीं तो आप ज्ञान से वांछित रह सकते यही.

प्रयास :

प्रयास की बात आती है तो हमें यह सिख शेर से मिलती है की काम कोई भी हो हमें प्रयास जरूर करना चाहिए . और प्रयास ऐसा की कभी उसमे कमी न होने पाए. शेर जब भी शिकार करता यही तो वह अपना पूरा जोर अपने शेर पर रहता है.