भारत देश मे कई स्थान एसे है जिनसे भारत देश की पहचान होती है। जेसे ताजमहल, स्वर्ण मंदिर जेसे अजूबे आज भी भारत देश की शान बने हुये है। भारत के सात अजूबे सिर्फ दो अजूबो को छोडकर अन्य सभी छोटे छोटे शहरो या गाव मे है सिर्फ ताजमहल ओर स्वर्ण मंदिर ही प्रख्यात शहरो मे स्थित है। आज हम आपको भारत के सात अजूबो से रूबरू कराने जा रहे है।

1 :- श्रवणबेलगोला (कर्नाटक)
2 :- स्वर्ण मंदिर (पंजाब )
3 :- ताज महल ( उत्तर प्रदेश )
4 :- हाम्पी (कर्नाटक)
5 :- कोणार्क (उड़ीसा)
6 :- नालंदा ( बिहार)
7 :- खजुराहो (मध्य प्रदेश)

श्रवणबेलगोला या गोमतेश्वर (कर्नाटक)

983 ई मे एक ही पत्थर को तराशकर बनाई गई गोमतेश्वर की मूर्ति को बाहुबली नाम से भी जाना जाता। श्रवणबेलगोला या गोमतेश्वर मूर्ति तक पाहुचने के लिए 618 सीढ़ियो को चड्कर जाना होता है।धार्मिक रूप से इस मूर्ति का काफी महत्व माना जाता है। जेन संप्रदाय के अनुसार संसार मे सर्वप्रथम मोक्ष की प्राप्ति बाहुबली को ही हुई थी। इस मूर्ति की लंबाई 60 फ़ुट है। सिर्फ यही एक मूर्ति एसी है जो नग्न अवस्था मे है। 12 वर्षों में हजारो लाखो श्रद्धालु मूर्ति का महाभिषेक करते है।

स्वर्ण मंदिर (पंजाब )

सीख समुदाय का प्रमुख तीर्थ स्थल कहे जाने वाले स्वर्ण मंदिर भारत मे ही नहीं बल्कि पूरे विश्व मे प्रख्यात है। सीख समुदाय का तीर्थ स्थल होने के साथ ही यह सीखो का सबसे पुराना गुरुद्वारा भी है। स्वर्ण मंदिर को भगवान के घर के नाम से भी जाना जाता है। स्वर्ण मंदिर के चहु ओर सरोवर है जो स्वर्ण मंदिर की शोभा मे चार चाँद लगाते है।

ताज महल ( उत्तर प्रदेश )

प्यार की निशानी कहे जाने वाले ताज महल का निर्माण मुग़ल सम्राट शाहजहां ने मुमताज महल की प्यार की यादों मे बनवाया था। ताजमहल को वास्तुकला का बेजोड़ अद्वितीय नमूना माना जाता है। ताजमहल के निर्माण का प्रमुख हकदार उस्ताद अहमद लाहौरी को माना जाता है। ताजमहल के निर्माण के लिए श्रीलंका,अफगानिस्तान से कुछ पत्थर मगवाए थे। ताजमहल का निर्माण 17 वर्ष मे पूरा हुआ था।

हाम्पी (कर्नाटक)

हाम्पी मे आपको भारत की लगभग हर वास्तुकला का अंश देखने को मिलेगा। यहा पर आप निगरानी के बुर्जों,अस्तबलों, बाजारों, मंदिरों,महलों, पत्थर की विभिन्न मूर्तियो का संग्रह देखा जा सकता है।

कोणार्क (उड़ीसा)

कोणार्क सूर्य मंदिर को ब्लैक पगोड़ा नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर को सात घोड़ों द्वारा आकाश मे ले जाते हुये बताया गया है। मंदिर के प्रारम्भ मे ही सिह ने हाथियो को पकड़े रखा दिखाया गया है।

नालंदा ( बिहार)

427 ई. से 1197 ई के दरमियान नालंदा एक बौद्ध शिक्षा का केंद्र था। कहा जाता है की यह इतिहास का सबसे पहला विश्वविद्यालय था। अपने समय मे इस विश्वविद्यालय मे करीब 2,000 शिक्षक 10,000 छात्रों को अध्ययन कराते थे। इस विश्वविद्यालय मे सिर्फ एक ही प्रवेश द्वार था।

खजुराहो (मध्य प्रदेश)
खजुराहो मंदिर मे भारत के सबसे आकर्षक वास्तुकला और मूर्तिकला का मिश्रण का प्रतीक है। खजुराहो को भारत की बेजोड़ कलाकारी का नमूना माना जाता है। मंदिर मे लगे गुलाबी या हल्के पीले रंग के विभिन्न बलुआ पत्थर कई संप्रदाय से संबंध रखता है।

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