राजीव गांधी एक ऐसी शक्शियत है जिनका नाम आज भी युवाओं की जुबान पर है। राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को मुंबई( महाराष्ट) में हुआ था। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था की इन्दिरा गांधी के पुत्र इतनी कम उम्र में इतनी शोहरत हासिल कर लेंगे। राजीव गांधी भारी बहुमत से विजय होकर भारत के सातवें प्रधानमंत्री बने थे। राजनीती में आने से पहले राजीव गांधी पायलट के पद पर कार्यरत थे। जहाज़ दुर्घटना में अपने भाई संजय गांधी की मृत्यु के उपरांत इन्दिरा गांधी को राजनीती में सहयोग के लिए राजीव गांधी ने पहली बार राजनीती में कदम 1982 में रखा।

31 अक्टूबर 1984 को आतंवादियो द्वारा देश की प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी की हत्या के बाद सत्ता की दौर राजीव गांधी पर आ गई। राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री का पद बड़ी निष्ठा और पूर्ण कर्तव्य के साथ निभाया जिसकी सहायता से आम चुनाव में जनता का दिल जितकर भारी बहुमत से विजय हो कर देश के प्रधानमंत्री के पद पर अपना दबदबा मजबूत कर लिया। किसी ने इस बात का अंदाजा भी नहीं लगाया था जिन्होंने आम चुनाव में भारी बहुमत से विजय हो कर प्रधानमंत्री का पद पक्का किया। उनकी मोत कुछ इस तरह होगी जिसके बारे में किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।

1991 की वह भयानक रात तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में 21 मई करीब 10 बजकर 20 मिनट के दरमियान देश की जनता की सासे थम गई जब उन्हें पता चला की बम धमाके में राजीव गांधी के चीथड़े उड़ गए। श्रीपेरंबदूर में मंच पर जब एक तीस वर्षीय युवती चंदन के हार के साथ जैसे ही राजीव गांधी के पैर छूने के लिए झुकी पटाखो की आवाज के साथ जोरदार धमाका हुआ जिसमे सेकड़ो लोगो के साथ राजीव गांधी की मृत्यु हो गई। चारो तरह सिर्फ खून ही खून और शरीर के छोटे छोटे टुकड़े बिखरे पड़े थे।

मंच पर हुए भयंकर धमाके राजीव गांघी के शरीर का एक हिस्सा उल्टा गिरा हुआ था। सर पूरी तरह से फट चूका था जिस वजह से डिमाग बहार निकल कर एक अधिकारी के पेरो में गिरा हुआ था। जिस समय राजीव गांधी की मृत्यु की खबर सोनिया गांधी को लगी तो उन्हें अस्थमा का दौरा पड़ा और वह बेहोश हो गई। राजीव गांधी के मर्डर की तहकीकात के लिए एक विशेष दाल का गठन किया गया। राजीव गांधी की मृत्यु के कुछ महीनो के बाद ही पुलिस ने सात व्यक्तियों को गिरफ्तार किया। लेकिन हत्या के मुख्य दोषी शिवरासन और उनके सहयोगियों ने जहर खा कर जान दे दी।

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