भारत के राष्ट्रगान जन गन मन की ध्वनि जेसे ही हमारे कानो मे गूँजती है मन मे देशभक्ति की भावना उत्पन्न हो जाती है। लेकिन क्या आप जानते है की सन 1911 से ही भारत के राष्ट्रगान को लेकर विवाद चल रहा है। जानकारी के अनुसार कहा गया है की जन गन मन अंग्रेज़ो के जमाने मे उनके राजा के लिखा गया था। लेकिन कई समय तक चले विवाद के बाद जवाहरलाल नेहरू ने जन गन मन भारत का राष्ट्रगान घोषित किया था। लेकिन असेंबली में भारत का राष्ट्रगान जन गन मन को नहीं बल्कि वंदेमातरम को चुना था।

राष्ट्रगान के रचयिता रविंद्रनाथ टैगोर है। भारत का राष्ट्रगान जन गन मन सर्वप्रथम बार 1911 में गाया था। सर जार्ज के प्रथम बार भारत आने पर भारत मे पहली बार राष्ट्रगान गाया था। सन 1947 में जब भारत के राष्ट्रगान होने पर विवाद हुआ था तब असेंबली में वंदे मातरम ओर जन-गण-मन के बीच चुनाव किया गया था। हालाकी चुनाव मे सबसे ज्यादा वोट वंदे मातरम को ही मिले थे लेकिन जवाहरलाल नेहरू इस बात से संतुष्ट नहीं थे उनके अनुसार देश का राष्ट्रगान जन गन मन होना चाहिए।

जन मन गण को लेकर सन 1947 से ही विवाद चल रहा है। विवाद मे कहा गया की जन मन गण देश के लिए नहीं बल्कि अंग्रेज़ो के राजा के लिए बनाया गया था। इंग्लैंड के जार्ज पंचम ने जन गण मन का अँग्रेजी मे अनुवाद कराया था। वर्षो तक चला यह विवाद 24 जनवरी 1950 मे खत्म हुआ। 1950 मे जन गण मन को राष्ट्रगान की मान्यता दी। जन मन गण 52 सैकेंड के लिए गाया गया।

अंग्रेज़ो को जलाने के लिए रवीन्द्रनाथ टेगौर से जन मन गण की रचना कराई गई थी। क्यो की अंग्रेज़ वंदेमातरम से अत्यधिक जलते थे। आज भी दुनिया का सबसे प्रसिद्ध गीत वंदेमातरम् को ही माना जाता है। कहा गया है की जवाहरलाल नेहरू के अनुसार जन गण मन को बैंड पर गाया जा सकता है जबकि वंदे मातरम को नहीं इसलिए नेहरू जी वंदे मातरम को नहीं बल्कि जन गण मन को भारत का राष्ट्रगान बनाना चाहते थे ।

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