महाशिअन दी हात्ती लिमिटेड (MDH) मसाले देश में ही नहीं अपितु विदेशो में भी इसका नाम प्रख्यात है। भोजन में यदि MDH मसाले न हो तो खाने का मजा ही आता। महाशिअन दी हात्ती लिमिटेड (MDH) की स्थापना 1919 में की गई थी। आज देश में ही नहीं बल्कि विदेशो में भी MDH मसालों की मांग की जा रही है। MDH महाशय चुनी लाल चैरिटेबल ट्रस्ट संस्था से जुडी हुई है।

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  • गुलाटी जी का जन्म  सियालकोट में 27 मार्च 1923  को हुआ था।
  • महाशय धरमपाल गुलाटी की माता जी का नाम चनन देवी और पिता जी का नाम  महाशय चुन्नीलाल था।
  • गुलाटी जी के माता पिता धार्मिक प्रवत्ति के व्यक्ति थे।
  • गुलाटी जी ने पाचवी की पढाई भी अधूरी छोड़ दी थी।
  • 1937 में उन्होंने पिताजी के साथ बिजनेस प्रारम्भ किया।
  • कई व्यापर करने के बाद भी गुलाटी का मन किसी कम में नहीं लगने के से उन्होंने अपने पारिवारिक कार्य को आगे बढाने की सोची।
  • इससे पहले उन्होंने साबुन का व्यापर,कपड़ो का व्यापार और बाद में चावल के व्यापारी बने थे।
  • महाशय धरमपाल गुलाटी ने  मेहनत और लगन से कार्य कर सम्पूर्ण देश में देग्गी मिर्च का प्रचार किया।
  • भारत पाकिस्तान के बटवारेके बाद 27 सितम्बर 1947को  धरमपाल गुलाटी जी भारत आ गए।
  • भारत आने पर गुलाटी जी के पास 1500 सो रूपये थे।
  • धरमपाल जी ने दिल्ली में 650 रुपये का टांगा ख़रीदा।
  • गुलाटी जी अपने टांगे को न्यू दिल्ली स्टेशन से कुतब रोड और करोल बाग़ से बड़ा हिन्दू राव तक चलाकर अपना जीवन व्यतीत करने लगे।
  • गुलाटी जी ने फिर अपना व्यापार प्रारम्भ किया। और MDH का नाम रोशन किया।
  • व्यापार में सच्ची लगन एवं निष्ठा के साथ उन्होंने अपनी कम्पनी का नाम रोशन किया।
  • महाशय गुलाटी जी ग्राहकों को अच्छी सुविधाए देते गए और बुलन्दियो को छूते गए।
  • गुलाटी जी हमेशा धार्मिक कार्यो के लिए तत्पर रहते थे।
  • महाशय गुलाटी जी ने 1975 में दिल्ली में एक छोटा सा अस्पताल खोला।
  • 1984 में इन्होने अपनी माता के नाम पर 20 पलंगों का दिल्ली में एक अस्पताल स्थापित करवाया।
  • यही अस्पताल अब विकसित हो कर पाच एकड़ में फेला एवं 300 पलंगों का अस्पताल हो गया है।
  • आज भी उस अस्पताल में गरीबो का मुफ्त इलाज हो रहा है।
  • गुलाटी जी स्वयं तो नहीं पड़े अपितु उन्होंने बछो की उच्च शिक्षा के लिए कई स्थानों पर स्कूल की  स्थापना की।
  • गुलाटी जी की संस्था देश की कई बड़ी बड़ी संस्था इससे जुडी हुई है।
  • महाशय गुलाटी जी ने स्वयं कुल 20 से अधिक स्कूल की स्थापना की।
  • गुलाटी जी अपने हर दिन का कुछ समय बच्चो के साथ व्यतीत करते है।
  • महाशय गुलाटी जी ने कई गरीब लडकियों का विवाह करवाया।
  • महाशय जी की  संस्थाओ में रह रहे कई अनेक गरीब बच्चो के जीवन का पालन पोषण एवं स्कूल का सम्पूर्ण खर्चा महाशय जी उठा रहे है।
  • गुलाटी जी ने कभी भी समाज या जाती में भेदभाव नहीं किया। जिसके चलते उनकी संस्था में कई धर्मो व समुदाय के व्यक्ति रक् साथ रह रहे है।