भस्म रमैया भोले..

0
भस्म रमैया भोले..

महाकाल अपने भक्तो को कभी भी निराश नहीं करते है। उनके मन की हर इच्छा बोले अपने दरबार में पूरी करते है। अगर तन मन धन से महाशिवरात्रि को महाकाल की पूजा अर्चना की जाये तो बा अपने भक्तो की बिगड़ी बनाने जरूर आते है। शाश्त्रो के अनुसार कहा गया है की आज के दिन भगवन शंकर ने ब्रम्हा के अवतरण से धरती पर रूद्र का जन्म लिया था। तभी से आज के दिन को शिवरात्रि के नाम से जाना जाता है। शिवरात्रि को कालरात्रि भी कहा जाता है ।

क्यों मनाया जाता है शिवरात्रि का पर्व ?

शिवरात्रि  का ही एक हिस्सा है। जिसे बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है। कहा जाता है की शिवरात्रि को भोले अपने भक्तो की हर मनोकामनाओ को पूरा करते है। आज के दिन भोले सर्वदयालु बन जाते है.और भक्तो की मझदार को पार लगाते है। कहा जाता है की आज के दिन क्रोध में भगवान शिव शंकर ने प्रदोष कल में रूद्र अवतार ले कर तांडव किया था और सम्पूर्ण सष्टि को भस्म किया था। तभी से इस दिन को शिव की रात, अथवा, काल की रात एवं शिवरात्रि कहा जाता है।

maha-shivratri-2016 (4)भस्म रमैया भोले :

भगवान शिव शंकर की सभी देवो में अलग ही पहचान है वे नित्य ही अपने शरीर पर भस्म लगा कर रखते है। मुख पर तेज प्रकाश और गले में नागो का डेरा रहता है। जटा में गंगा को समाये अथवा कंठ में विष को ले कर कैलाश पर विराजित रहते है । भोले का रूप सभी देवो से सर्वोपरि है। बोले के चारो और भुत पिशाच रहते है, और भांग गांजे का सेवन करते है। भगवन शंकर का मुख ज्वाला से भी तेज व विकराल है। नंदी की सवारी करने वाले बोले सभी भक्तो का दुःख हरते  है। भगवन राम ने भी कहा था की जो व्यक्ति भगवन शिव से द्रोह कर मुझे पाना चाहेगा वह कभी भी इस कार्य में सफल नहीं होगा।

शिवद्रोही मम दास कहावा. सो नर सपनेहु मोहि नहिं भावा.

maha-shivratri-2016 (2)

त्रिदेव की महिमा :शिवसागर में बताया गया है शिव मन्त्र है, शिव उच्चारण है, यही तंत्र है यही मन्त्र है, उस परम दयालु भगवान शिव को मेरा नत मस्तक प्रणाम। इसी कारन श्रावण मास के प्रारम्भ से ही श्रीराम चरित्र मानस का पाठ किया जाता है। शिव में तीनो रूप विराजमान है वही ब्रम्हा है वही विष्णु और वही महेश है।  जिस कारण भगवान शिव को त्रिदेव भी कहा जाता है।