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एशिया की सबसे बड़ी और दुनिया की चौथे नंबर की सबसे बड़ी रेल सेवा भारत में

भारतीय रेलवे की शुरुआत एशिया की सबसे बड़ी और इस संसार की चोथे नबर की सबसे बड़ी व्यवस्था रेल सेवा भारत में शुरू हुई थी। 16 अप्रैल 1853 को दोपहर साढ़े तीन बजे मुंबई के उपनगर बोरीबंदर से ठाणे के बीच 3.4 किलोमीटर तक पहली बार ट्रेन चली थी। इस ट्रेन सफर 75 मिनट में पूरा हुआ था। बोरीबंदर से ठाणे के बीच भायखला एव सायन के स्टेशन भी पड़े थे 6867 स्टेशनों से गुजराती भारतीय रेल प्रतिदिन लगभग 11,270 रेले चलती है ।

रेल के तीन गेज

तीन गेज – ब्राडगेज (बड़ी लाइन), मीटर गेज (छोटी लाइन) और तीसरी गेज नैरोगेज ( संकरी लाइन ) यह तीनो गेजे है। ब्राडगेज की चौड़ाई 1676 मिमी. मीटर गेज की चौड़ाई 1000 मिमी.(1 मी.) तीसरी नैरोगेज की चौड़ाई 2 फीट (लाईट गेज ) तथा 2 फुट 6 इंच होती है ब्राडगेज समतल पठारी क्षेत्र में होते है । नैरोगेज पहाड़ी क्षेत्रो में होते है मीटर गेज को ब्राडगेज में बदलाव किया जा रहा है । आज देशो में प्रतिदिन एक करोड़ तीस लोग ट्रेन में सफर कर रहे है ।

देश की पहली मेट्रो ट्रेन

भारतीय में मेट्रो रेलवे का आरम्भ 1984-85 में हुआ । कोलकाता में एस्प्लेनेड से भवानीपुर बीच पांच स्टेशनों को जोड़ने वाले 35 किमी मेट्रो रेलवे का व्यवसायिक परिचालन भी इसी प्रकार शुरू हुआ बाद में दमदम से बेलगाचिया तक 22 किमी का रेल मार्ग भी व्यासायिक परिचालन के लिए खोला गया था।

मेट्रो रेल की कार्य प्रणाली

इस कि कार्य प्रणाली रेल प्रशासन एव प्रबंधक का काम रेलवे बोर्ड के अधीन है । कैबिनट मंत्री की देखरेख में काम करता है भारतीय रेलवे बोर्ड में एक चेयरमैन होता है। भारतीय रेलवे मंत्रालय का पदेन प्रमुख सचिव होता है इस में एक आयुक्त होता है और चार सदस्य होते है ।

विदेशो में हवाओं से बाते

चीन के शंघाई के पुडांग हवाई अड्डे से शहर के व्यापार विभाग तक यात्रा करने वाली ‘मैगालेव ट्रेन’ 33 किलोमीटर की दुरी 435 किलोमीटर प्रीत घंटे की रफ्तार से केवल सात मिनट एवं 20 सेकंड में पूरी करती है । यह भारतीय मेट्रो ट्रेन चुम्बकीय प्रणाली पर काम करती है । ट्रेन में रोजाना 12 हजार यात्री यात्रा करते है । यह 3 अप्रैल 2007 को फ़ांस की टी जी वी रार्केट ट्रेन 574.73  किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है।

 

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